दूसरी लालटेन दीये की है, हॉर्न की नहीं। मोरटक्का। ओंकारेश्वर पास। समूह: मां नर्मदा आजीविका। अध्यक्ष: श्रीमती विजया जोशी। काम: आटे के दीपक।
कारण शीट का: प्लास्टिक दोने में दीपदान से नदी प्रदूषित; जलीय जीवों को नुकसान। समूह ने आटे का दीपक चुना। पंचायत एवं ग्रामीण विकास के स्वयं सहायता समूह की पंक्ति।
जो ऋण और जो घाट हैं
ऋण: डेढ़ लाख रुपये। खरीद: दीपक निर्माण की मशीन। मिशन: श्री आनंद शर्मा—पैकेजिंग, मार्केटिंग, ब्रांडिंग का सहयोग। दुकान: खेड़ीघाट, फूलमाला और किराना। भाव “उचित मूल्य”—शीट, दर सूची नहीं।
अध्यक्ष के दो वाक्य: प्लास्टिक कम; आटा मछली का भोजन। शास्त्रीय विधि से दीपदान की मान्यता—विश्वास की पंक्ति, प्रमाण पत्र नहीं। चित्र दीपक-समूह का फ्रेम है। रौनक नर्मदा को इस कोण में साफ नहीं लिखती।
मुख्य बातें
- डेढ़ लाख ऋण मशीन की पंक्ति है, सालाना आय नहीं।
- बिक्री खेड़ीघाट की फूलमाला-किराना दुकानों पर बताई गई है।
- प्रदूषण-कमी और मछली-भोजन समूह की बताई गई बात हैं, मापी गई मात्रा नहीं।
स्रोत और संदर्भ
- मध्य प्रदेश जनसंपर्क · मां नर्मदा को प्रदूषण मुक्त रखने के संकल्प के साथ “आटे के दीपक” का शुरू किया व्यवसाय ↗24 अप्रैल 2026
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 18 सितंबर 2026।



