अलग-अलग समस्याओं के लिए कई दफ्तरों तक जाने की जगह जिले में एकल-खिड़की व्यवस्था हो—मध्यप्रदेश के राज्य स्तरीय दिव्यांगजन सलाहकार बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक 30 मार्च 2026 को भोपाल में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण संचालनालय में हुई थी।
सरकारी सूचना के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य समस्याओं का समाधान एक ही स्थान पर कराना था। सूचना में केंद्रों के पते, संचालन की तारीख या समयसीमा नहीं दी गई। इससे जिले में व्यवस्था बनाने की दिशा तय होने की जानकारी मिलती है, किसी खास काउंटर के खुल जाने की नहीं।
प्रमाणपत्र और जिला समितियाँ
बैठक में बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कानूनी अभिभावकता के प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया सरल बनाने का भी निर्णय हुआ। जिला स्तरीय दिव्यांग सलाहकार बोर्ड के गठन और राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के तहत स्थानीय समितियों की बैठक हर तीन महीने कराने पर जोर दिया गया।
स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी बैंकों तक पहुँचाने और कैंटीन या व्यवसाय के विज्ञापन स्वैच्छिक संस्थाओं तक पहुँचाने के निर्देश भी दिए गए। इन बिंदुओं के साथ किसी नए आवेदन की अंतिम तारीख या प्राप्तकर्ताओं की संख्या प्रकाशित नहीं की गई।
सार्वजनिक भवनों तक पहुँच की जाँच
सार्वजनिक भवनों का एक्सेस ऑडिट—यानी उनमें पहुँच और उपयोग की सुगमता की जाँच—कराने तथा विशेष सोशल ऑडिट टीम बनाने का प्रस्ताव रखा गया। यह अभी बैठक में रखा गया प्रस्ताव था; सूचना इसे पूरा हो चुका सर्वेक्षण नहीं बताती।
यूडीआईडी कार्ड के साथ आयुष्मान कार्ड जारी करने का सुझाव और हर जिले में घरौंदा योजना का केंद्र बनाने पर विचार भी हुआ। निर्णय, प्रस्ताव और चर्चा के इन स्तरों को साथ पढ़ने से बैठक का सही दायरा सामने आता है। किसी सुविधा का इस्तेमाल करने से पहले उसका स्थान और लागू आदेश संबंधित विभाग की बाद की सूचना से जाँचना होगा।
मुख्य बातें
- हर जिले में एकल-खिड़की व्यवस्था स्थापित करने का निर्णय दर्ज हुआ।
- कानूनी अभिभावकता के प्रमाणपत्र की प्रक्रिया सरल करने का निर्णय भी लिया गया।
- सार्वजनिक भवनों के एक्सेस ऑडिट और विशेष सोशल ऑडिट टीम का प्रस्ताव रखा गया।
स्रोत और संदर्भ
- मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग / MPInfo · राज्य स्तरीय दिव्यांगन सलाहकार बोर्ड की बैठक सम्पन्न ↗30 मार्च 2026
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



